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The Perfection of Yoga ( Hindi )
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The Perfection of Yoga ( Hindi )

by A.C. Bhaktivedanta Swami Prabhupada

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योग अंततः कहाँ ले जाता है? सभी योगों की पूर्णता भक्ति है — कृष्ण के प्रति भक्ति।

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About This Book

यह पुस्तक योग के वास्तविक लक्ष्य को सरल और व्यावहारिक रूप में समझाती है—जिसका सार है श्री कृष्ण में पूर्ण रूप से मन को स्थिर करना। यह भगवद्गीता की शिक्षाओं पर आधारित है और ए. सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद द्वारा प्रस्तुत की गई है। यह स्पष्ट करती है कि “योग में सिद्धि” का वास्तविक अर्थ क्या है। पुस्तक बताती है कि पारंपरिक योग प्रणालियाँ—विशेषकर ध्यान योग—आज के युग में अत्यंत कठिन हैं, क्योंकि इनमें एकांत, ब्रह्मचर्य और इंद्रियों पर पूर्ण नियंत्रण जैसी कठोर आवश्यकताएँ होती हैं। इसलिए वर्तमान समय में भक्ति योग को सबसे सरल और प्रभावी मार्ग के रूप में प्रस्तुत किया गया है। मुख्य शिक्षा यह है कि योग की पूर्णता तब प्राप्त होती है जब मन निरंतर श्री कृष्ण में प्रेमपूर्वक स्थिर रहता है। केवल मन को रोकना या संसार से दूर होना ही योग नहीं है, बल्कि मन को सकारात्मक रूप से भगवान के स्मरण और सेवा में लगाना ही वास्तविक योग है।

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