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📖 Enquiring about: The Laws of Nature ( Hindi )
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About This Book
यह पुस्तक एक दार्शनिक और भक्तिपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है, जिसमें बताया गया है कि संपूर्ण ब्रह्मांड चेतना और कर्म के सूक्ष्म नियमों के अधीन कार्य करता है। यह भगवद्गीता की शिक्षाओं पर आधारित है और ए. सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद द्वारा समझाया गया है।
यह पुस्तक इस विचार को चुनौती देती है कि प्रकृति केवल संयोग या स्वतंत्र रूप से कार्य करती है। यह स्पष्ट करती है कि भौतिक प्रकृति एक उच्च नियंत्रण के अंतर्गत व्यवस्थित रूप से कार्य करती है, और प्रत्येक जीव अपने कर्मों के नियम (कर्मफल) के अधीन है।
यह बताती है कि कुछ भी संयोग से नहीं होता; सुख और दुःख पूर्व कर्मों और चेतना के परिणाम हैं।
यह पुस्तक स्पष्ट करती है कि—
• प्रकृति अंधी या आकस्मिक नहीं है, बल्कि उच्च बुद्धि द्वारा नियंत्रित है।
• जीव अपने कर्मों के लिए स्वयं उत्तरदायी है।
• भौतिक नियम आत्मा को जन्म और मृत्यु के चक्र में बाँधते हैं।
• मानव जीवन इन नियमों को समझने और उनसे ऊपर उठने का अवसर है।
यह भक्ति-योग को इन भौतिक नियमों से ऊपर उठने का मार्ग प्रस्तुत करती है, जिसमें चेतना को भगवान श्री कृष्ण के साथ जोड़कर व्यक्ति कर्मबंधन से मुक्त हो सकता है। भक्ति के माध्यम से जीव भौतिक ऊर्जा से ऊपर उठकर शाश्वत स्वतंत्रता प्राप्त करता है।