by A.C. Bhaktivedanta Swami Prabhupada
यह पुस्तक योग के परम लक्ष्य—भगवान श्री कृष्ण के साथ पूर्ण मिलन—का एक शक्तिशाली प्रस्तुतीकरण है। यह स्पष्ट करती है कि विभिन्न योग प्रणालियाँ (कर्म, ज्ञान और ध्यान योग) तब तक अपूर्ण हैं जब तक वे भक्ति योग, अर्थात् शुद्ध भक्ति सेवा में समाप्त नहीं होतीं।
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