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📖 Enquiring about: Dharma – The Way of Transcendence ( Hindi )
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About This Book
• यह पुस्तक धर्म के वास्तविक अर्थ का एक दार्शनिक अन्वेषण प्रस्तुत करती है, जिसमें धर्म को आत्मा के शाश्वत कर्तव्य के रूप में समझाया गया है। यह श्रीमद्भागवत की शिक्षाओं पर आधारित है और ए. सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद द्वारा विस्तार से समझाया गया है।
• यह पुस्तक वास्तविक धर्म और अस्थायी सामाजिक, धार्मिक या सांस्कृतिक कर्तव्यों के बीच अंतर को स्पष्ट करती है।
• यह बताती है कि धर्म केवल बाहरी कर्मकांड या नैतिक नियमों का समूह नहीं है, बल्कि जीव का स्वभाव है—जो भगवान श्री कृष्ण के साथ उसके शाश्वत संबंध में निहित है। जब यह संबंध भूल जाता है, तो जीव भौतिक संसार में उलझ जाता है।
• यह पुस्तक स्पष्ट करती है कि—
• वास्तविक धर्म सार्वभौमिक है और परिस्थितियों से नहीं बदलता।
• शरीर, समाज या विश्वास पर आधारित अस्थायी कर्तव्य गौण हैं।
• धर्म का सर्वोच्च स्वरूप प्रेमपूर्ण भक्ति सेवा है।
• जो धर्म भगवान श्री कृष्ण के प्रति भक्ति को जागृत नहीं करता, वह पूर्ण नहीं है।